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Sheetala Ashtami (बसौड़ा) पूजा देवी शीतला को समर्पित त्यौहार है और होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। उत्तर भारत में शीतला अष्टमी को बसौड़ा (Basoda)पूजा के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह होली के आठ दिनों के बाद पड़ता है लेकिन कई लोग इसे होली के बाद पहले सोमवार या शुक्रवार को मनाते हैं। शीतला अष्टमी उत्तर भारतीय राज्य जैसे गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है।

बसौड़ा रिवाज (Basoda) के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन खाना पकाने के लिए आग नहीं जलाते हैं। इसलिए अधिकांश परिवार शीतला अष्टमी के एक दिन पहले शीतला सप्तमी (Sheetala Saptami) को खाना बनाते हैं और शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami)के दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी शीतला चेचक, चेचक, खसरा आदि को नियंत्रित करती हैं और लोग उन बीमारियों के प्रकोप को दूर करने के लिए उनकी पूजा करते हैं।

गुजरात में, कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पहले बसोड़ा जैसा ही अनुष्ठान मनाया जाता है और इसे शीतला सतम के नाम से जाना जाता है। शीतला सतम भी देवी शीतला को समर्पित है और शीतला सतम के दिन कोई भी ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है।

शीतला अष्टमी 2022 – Sheetala Ashtami 

दिनांक : 25 मार्च 2022
दिन : शुक्रवार
अष्टमी तिथि प्रारम्भ : 25 मार्च 2022 को 12:09 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त : 25 मार्च 2022 को 10:04 पी एम बजे
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त : 06:20 ए एम से 06:35 पी एम
अवधि : 12 घण्टे 15 मिनट्स

बसौड़ा के दिन इन बातों का रखें ध्यान

शीतला अष्टमी के दिन गर्म चीजें नहीं खाई जाती है। इसके साथ ही घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। एक दिन पहले ही रात में ही सारा भोजन हलवा, गुलगुले, रेवड़ी आदि तैयार करके रख लेना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन गर्म पानी से नहाने की भी मनाही है। शीतला अष्टमी के दिन शीतल जल से ही नहाने की परंपरा है।

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Sheetala Saptami 2022 : रोगनाश और समृद्धि प्राप्ति के लिए करें शीतला सप्तमी का व्रत https://astrodeeva.com/sheetala-saptami-2022-for-the-sake-of-healing-and-prosperity-fast-on-sheetala-saptami/ https://astrodeeva.com/sheetala-saptami-2022-for-the-sake-of-healing-and-prosperity-fast-on-sheetala-saptami/#respond Mon, 21 Mar 2022 13:02:12 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3018 Sheetala Saptami 2022 – शीतला सप्तमी हिन्दुओं का एक त्योहार है जिसमें शीतला माता के व्रत और पूजन का विधान हैं। शीतला माता एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी हैं। इनका प्राचीनकाल से ही बहुत अधिक माहात्म्य रहा है। प्रायः शीतला माता की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से प्रारंभ होती है, लेकिन कुछ […]

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Sheetala Saptami 2022 – शीतला सप्तमी हिन्दुओं का एक त्योहार है जिसमें शीतला माता के व्रत और पूजन का विधान हैं। शीतला माता एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी हैं। इनका प्राचीनकाल से ही बहुत अधिक माहात्म्य रहा है। प्रायः शीतला माता की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से प्रारंभ होती है, लेकिन कुछ स्थानों पर इनकी पूजा होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार अथवा गुरुवार के दिन ही की जाती है।

शीतला सप्तमी का क्या महत्व – Significance Of Sheetala Saptami

शीतला सप्तमी पर्व की प्रासंगिकता स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, माता  शीतला मां पार्वती का अवतार हैं। देवी शीतला प्रकृति की उपचार शक्ति का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर, भक्त अपने बच्चों के साथ माता की पूजा करते हैं और देवी  से छोटी माता और चेचक जैसी बीमारियों से सुरक्षित और संरक्षित रहने के लिए प्रार्थना करते हैं। ‘शीतला’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘शीतलता’ या ‘शांत’।

स्कंद पुराण में शीतला माता का वाहन गर्दभ को बताया है। माता अपने हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं। इन बातों का प्रतीकात्मक महत्व होता है। चेचक का रोगी व्यग्रतामें वस्त्र उतार देता है। सूप से रोगी को हवा की जाती है, झाडू से चेचक के फोड़े फट जाते हैं। नीम के पत्ते फोडों को सड़ने नहीं देते। रोगी को ठंडा जल प्रिय होता है अत:कलश का महत्व है। गर्दभ की लीद के लेपन से चेचक के दाग मिट जाते हैं।

स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना का स्तोत्र शीतलाष्टक के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने लोकहित में की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है, साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है। शास्त्रों में देवी शीतला की वंदना के लिए यह मंत्र बताया गया है:

वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।

(अर्थात, गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाडू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तकवाली भगवती शीतला की मैं वंदना करता हूं।)

शीतला माता के इस वंदना मंत्र से यह पूर्णत:स्पष्ट हो जाता है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में मार्जनी [झाडू] होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश से हमारा तात्पर्य है कि स्वच्छता रहने पर ही स्वास्थ्य रूपी समृद्धि आती है।

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शीतला सप्तमी 2022 शुभ मुहूर्त- Sheetala Saptami 2022

दिनांक : 24 मार्च 2022
दिन : बृहस्पतिवार
सप्तमी तिथि प्रारम्भ : 24 मार्च 2022 को 02:16 ए एम बजे
सप्तमी तिथि समाप्त : 25 मार्च 2022 को 12:09 ए एम बजे
शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त : 06:21 ए एम से 06:34 पी एम
अवधि : 12 घण्टे 14 मिनट्स

शीतला सप्तमी के दिन क्या करना चाहिए-

शीतला माता की पूजा का विधान भी विशिष्ट होता है। यह दो दिवसीय पर्व है। शीतला सप्तमी के दिन माता को भोग लगाने के लिए बासी खाने का भोग यानि बसौड़ा ( Basoda ) तैयार किया जाता है। इनमें हलवा, पूरी, दही बड़ा, पकौड़ी, पुए रबड़ी आदि बनाया जाता है और दूसरे दिन अष्टमी को  उसी बासी भोजन को नैवेद्य के रूप में माता को समर्पित किया जाता है और भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस कारण से ही संपूर्ण उत्तर भारत में शीतलाष्टमी त्यौहार, बसौड़ा(Basoda) के नाम से विख्यात है। ऐसी मान्यता है ये ऋतु का अंतिम दिन होता है और इस दिन के बाद से बासी खाना खाना उचित नहीं होता है।

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