if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } shradh 2020 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shradh-2020/ Daily Dose of Astrology Thu, 17 Sep 2020 05:48:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png shradh 2020 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shradh-2020/ 32 32 Horoscope 17 September 2020: दैनिक राशिफल।सर्वपितृ अमावस्या।अधिक मास प्रारंभ। https://astrodeeva.com/horoscope-17-september-2020-adhikmas-shradh/ https://astrodeeva.com/horoscope-17-september-2020-adhikmas-shradh/#respond Thu, 17 Sep 2020 05:48:10 +0000 https://astrodeeva.com/?p=749 आज सर्वपितृ अमावस्या है शास्त्रों के अनुरार “श्रद्धयां इदम् श्राद्धम्” अर्थात पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध है।साधारण शब्दों में श्राद्ध अपनेकुल देवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की सही तारीख / दिन नहीं पता होता, वे लोग इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और भोजन समर्पित […]

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आज सर्वपितृ अमावस्या है शास्त्रों के अनुरार “श्रद्धयां इदम् श्राद्धम्” अर्थात पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध है।साधारण शब्दों में श्राद्ध अपनेकुल देवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की सही तारीख / दिन नहीं पता होता, वे लोग इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और भोजन समर्पित करके याद करते हैं।

आज 17 सितम्बर से अधिक मास प्रारंभ हो कर 16 अक्टूबर तक रहेगा। इस माह में श्री हरि का पूजन और विष्णु मंत्रो का जाप अत्यधिक फलदायी होता है।

दैनिक राशिफल 

मेष राशि 

 पारिवारिक जीवन के लिए यह समय मिला-जुला रह सकता है। परिवार में मतभेद या तनाव उत्पन्न कर सकती है | आपके ख़र्चों में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। प्रेमी के साथ आपकी दैनिक मुलाक़ातें बढ़ेंगी। आपके बीच उपहारों का लेन-देन संभव रहेगा |

वर्षभ राशि 

पैसे कमाने के लिए आपको कई बेहतरीन मौक़े मिलेंगे, लेकिन उम्मीद के हिसाब से आपको फायदा नहीं हो पाएगा। सामाजिक तौर पर आपको कोई बड़ा मान-सम्मान मिलने के संकेत हैं। मित्रों व कुछ पुराने परिचितों से मिलना संभव रहेगा।  वैवाहिक जीवन आनंदमय बना रहेगा। 

मिथुन राशि 

आज  के दिन इंकम के नए सोर्स बनेगे | पारिवारिक सोहार्द बना रहेगा | परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी | माँ के स्वास्थ्य का ध्यान रखे | पुराना निवेश आपको आर्थिक लाभ देगा | पार्टनर का साथ मिलेगा |

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कर्क राशि 

इस राशि के जातक आज वाणी पर संयम रखें। आज अपने पार्टनर  को नज़रअंदाज़ करना तनाव का कारण बन सकता है | अच्छी चीजों को सीखने के लिए आपना दिमाग एक दम खुला रखें,जो की भविष्य मे आपके लिए लाभ दायक सिद्ध होगा|

सिंह राशी 

आर्थिक लाभ के योग बन रहे है | मित्रों का सहयोग मिलेगा | पारिवारिक जीवन आनंदमय रहेगा | आपके पारिवारिक जीवन मे आपके जीवनसाथी के क्रोध की अधिकता रहती है, आप अपने क्रोध पर संयम रखें ताकि जीवनरथ सुगमता और तालमेल से चले| शॉर्टकट से आपके पेसे कमाने की नीति को आपको बदलना होगा |

कन्या राशि 

अपने विचार और ऊर्जा को उन कामों में लगाएँ, जिनसे आपके सपने हक़ीक़त का रूप ले सकते हैं | सिर्फ़ ख़याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं होता है | अभी तक आपके साथ समस्या यह है कि आप कोशिश करने की बजाय केवल इच्छा करते हैं | अपने परिवार के सदस्यों की ज़रूरतों पर ध्यान देना आज आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए |

तुला राशि 

छात्रों की उन्नति होगी सारे कार्य जो आपके पुराने पड़े हुए हैं वो पूर्ण होंगे । शारीरिक स्वास्थ्य बड़िया रहेगा |  आज का दिन प्रफुलित रहेगा, मित्रों के साथ मिलना जुलना रहेगा । वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। आर्थिक लाभ के योग है।

वृश्चिक राशि  

इस राशि के जातकों के लिए आज का दिन थकान भरा रहेगा | कई दिन से रुके काम को आप एक साथ निपटाने की आदत से बचे | थोड़ी देर रुके और जो जरूरी है पहले उसे समाप्त करे। काम की एक परियोजना बना ले और थोडा आराम आपके लिए बहुत जरूरी है | आपको अपने खाने –पीने की आदत मे सुधार की अत्यधिक आवश्यकता है  वरना पेट संभनन्दि परेशानी बड़ सकती है |

धनु राशि 

आज का दिन आपके लिए उत्तम रहेगा आपका ग्रस्थ जीवन आनंद मयी रहेगा । आर्थिक पक्ष पे ध्यान देने की जरुरत हैं। छात्रों की उन्नति होगी सारे कार्य जो आपके पुराने पड़े हुए हे वो पूर्ण होंगे। शारीरिक स्वास्थ्य बड़िया रहेगा |  दिन प्रफुलित रहेगा ,मित्रों के साथ मिलना जुलना रहेगा। 

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 मकर राशि 

आज का दिन सावधानी पूर्वक बिताए | कोई भी नया कार्य और व्यवसाय शुरू की योजना पर पुनः विचार करें| वाणी और व्यवहार मे संतुलन बनाय | पानी और बिजली के कार्यों को संभालकर करे | क्रोध पे भी स्यंम अति आवश्यक है | स्वास्थ्य के मामले मे लापरवाही न बरते | अनैतिक कार्यों से दूरी बना कर रखे |

कुम्भ राशि 

इस राशि के जातकों के लिए आज आप का दिन मंगलमय रहने वाला है | आज आप को जिन अवसरों की तलाश थी उसके लिए खुद को तैयार रखे, वो अवसर आप को प्राप्त होने के योग है। लोग आज  आपकी सलाह भी ले सकते है। आज पारिवारिक जीवन मे चल रहे कुछ महतवपूर्ण  कार्य पूरे होंग | अपना व्यवहार सकारात्मक बनाय रखें। परिवार के साथ किसी यात्रा पर जाने का योग बन रहा है | कार्य क्षेत्र  मे भी आपके पक्ष मे कुछ परिवर्तन हो सकते हे । 

मीन राशि 

इस राशि के जातक यात्रा पसंद होते है लेकिन जहाँ तक हो सके अभी यात्रा से बचे। रिश्तों को ताजा फूल की तरह अपने प्यार और योगदान को ताजगी से मेकहा के रखे | भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है|

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Shradh 2020: श्राद्ध कब और कैसे करें, जाने पूरा विवरण एवं विधि https://astrodeeva.com/shradh-2020/ https://astrodeeva.com/shradh-2020/#comments Sat, 29 Aug 2020 13:16:41 +0000 https://astrodeeva.com/?p=587 शास्त्र के अनुरार “श्रद्धयां इदम् श्राद्धम्” अर्थात पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध है। साधारण शब्दों में श्राद्ध अपनेकुल देवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में श्राद्ध 16 दिनों की विशेष अवधि है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर आश्विन की अमावस्या तक होता है। इस अवधि को श्राद्ध पक्ष, पितृपक्ष और महालय के नाम सेजाना जाता है। माना जाता है की इस अवधि के समय पूर्वज जिनका इस संसार से गमन हो गया है वो विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर अपनेरिश्तेदारों को आशीर्वाद देने के लिए आते हैं। श्राद्ध कैसे शुरू हुआ? महाभारत में गंगा पुत्र भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के विषय में खास बातें बताई थी की श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और फिर कैसे जनमानस तक पहुंची । महाभारत के अनुसार सबसे पहले श्राद्ध का उपदेश महातपस्वी अत्रि मुनि ने महर्षि निमि को दिया था और निमि […]

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शास्त्र के अनुरार “श्रद्धयां इदम् श्राद्धम्” अर्थात पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया कर्म ही श्राद्ध है। साधारण शब्दों में श्राद्ध अपनेकुल देवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में श्राद्ध 16 दिनों की विशेष अवधि है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर आश्विन की अमावस्या तक होता है। इस अवधि को श्राद्ध पक्ष, पितृपक्ष और महालय के नाम सेजाना जाता है। माना जाता है की इस अवधि के समय पूर्वज जिनका इस संसार से गमन हो गया है वो विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर अपनेरिश्तेदारों को आशीर्वाद देने के लिए आते हैं।

श्राद्ध कैसे शुरू हुआ?

महाभारत में गंगा पुत्र भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के विषय में खास बातें बताई थी की श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और फिर कैसे जनमानस तक पहुंची । महाभारत के अनुसार सबसे पहले श्राद्ध का उपदेश महातपस्वी अत्रि मुनि ने महर्षि निमि को दिया था और निमि ने ही श्राद्ध का प्रारम्भ किया था , उसके बाद अन्य महर्षि भी श्राद्ध करने लगे और तत्पशचात धीरे-धीरे चारों वर्णो के लोग श्राद्ध में पितरों को अन्न प्रदान करने लगे।

महाभारत में कर्ण अपनी मृत्यु के बाद स्वर्ग पहुंचे तो उन्हें खाने में सोना, चाँदी और हीरे जवाहरात भोजन के रूप में परोसे गये। इस पर, कर्ण ने स्वर्ग के स्वामी इंद्र से इस का कारण पूछा। इंद्र ने कर्ण को बताया कि पूरे जीवन भर उन्होंने सोने, चाँदी और हीरे-जवाहरात का ही दान किया है, परंतु कभी भी अपने पितरों के नाम से भोजन का दान नहीं किया। कर्ण ने इंद्र को इस का कारण बताया और कहा “हे देवराज! मुझे अपने पूर्वजों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए मैं ऐसा करने में असमर्थ रहा।“

तब, इंद्र ने कर्ण को पृथ्वी पर वापस जाने के सलाह दी, जहां उन्होंने इन्हीं सोलह दिनों के दौरान भोजन दान किया तथा अपने पूर्वजों का तर्पण किया। और इस प्रकार दानवीर कर्ण पित्र ऋण से मुक्त हुए।

श्राद्ध पक्ष के नियम :

  • श्राद्ध दोपहर के समय करना चहिये। शास्त्रों में सुबह और संध्या का समय देव कार्यों के लिए बताया गया हैं।
  • श्राद्ध में सफ़ेद फूल का ही प्रयोग करें।
  • पितरों का तर्पण दक्षिण मुख हो कर करें।
  • पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मण, जामाता, भांजा, मामा, गुरु, नाती को भोजन कराना चाहिए। इससे पितृगण अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • ब्राह्मणों को भोजन करवाते समय भोजन का पात्र दोनों हाथों से पकड़कर लाना चाहिए अन्यथा भोजन का अंश राक्षस ग्रहण कर लेते हैं। जिससे ब्राह्मणों द्वारा अन्न ग्रहण करने के बावजूद पितृगण भोजन का अंश ग्रहण नहीं करते हैं।
  • पितृ में द्वार पर आने वाले किसी भी जीव-जंतु को मारना या हकालन नहीं चाहिए अपितु उन के भोजन का उचित प्रबंध करना चाहिए।
  • हर दिन भोजन बनने के बाद एक हिस्सा निकालकर गाय, कुत्ता, कौआ अथवा चिंटियो को देना चाहिए। मान्यता है की इन्हें दिया गया भोजन सीधे पितरों को प्राप्त हो जाता है।
  • शाम के समय घर के द्वार पर एक दीपक जलाकर पितृगणों का ध्यान करना चाहिए।

श्राद्ध पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियाँ 

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस तिथि को जिसके पूर्वज गमन करते हैं, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए। परंतु निम्नलिखित तिथियाँ भी निर्धारित है जिस से अगर सही तिथि नहीं मालूम हो तो भी आप इन तिथियों को श्राद्ध कर सकते हैं:

  • आश्विन कृष्ण प्रतिपदा:—- इस तिथि को नाना-नानी के श्राद्ध के लिए सही बताया गया है। इस तिथि को श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। यदि नाना-नानी के परिवार में कोई श्राद्ध करने वाला न हो और उनकी मृत्युतिथि याद न हो, तो आप इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं।
  • पंचमी:— जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध इस तिथि को किया जाना चाहिए।
  • नवमी:—सौभाग्यवती यानि पति के रहते ही जिनकी मृत्यु हो गई हो, उन स्त्रियों का श्राद्ध नवमी को किया जाता है। यह तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम मानी गई है। इसलिए इसे मातृनवमी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर श्राद्ध कर्म करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है।
  • एकादशी और द्वादशी:— एकादशी में वैष्णव संन्यासी का श्राद्ध करते हैं।। अर्थात् इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किए जाने का विधान है, जिन्होंने संन्यास लिया हो।
  • चतुर्दशी:—इस तिथि में शस्त्र, आत्म-हत्या, विष और दुर्घटना यानि जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध किया जाता है। जबकि बच्चों का श्राद्ध कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को करने के लिए कहा गया है।
  • सर्वपितृ अमावस्या:- पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की सही तारीख / दिन नहीं पता होता, वे लोग इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और भोजन समर्पित करके याद करते हैं।

श्राद्ध कर्म करने की विधि 

प्रातः काल जल्दी उठकर नित्य कर्म करने के उपरांत स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। उसके बाद पितरों को याद करते हुए उन को जो भोजन पसंद था वो भोजन बनाएँ। बनाये गये भोजन से गाय, कुत्ते, देव/पथिक , कौए और चिंटियो के लिए भोजन का अंश निकल कर उन्हें प्रदान करें। इसके पश्चात अपने पितरों का तर्पण करते हुए अपने परिवार  के मंगल की कामना करनी चाहिए तथा पितरों का आशीर्वाद लेना चाहिए।  अपने द्वारा कोई भूल हुई है तो उसकी क्षमा मांगनी चाहिए। योग्य ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिए तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा भी देनी चाहिए।

श्राद्ध पक्ष 2020

इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 1 सितंबर से शुरू होगा और सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर को हैं।

दिनांक        वार          श्राद्ध                      मास

1 सितंबर    मंगलवार      पूर्णिमा श्राद्ध               भाद्रपद

2 सितंबर     बुधवार      प्रतिपदा श्राद्ध               अश्विन  

3 सितंबर     गुरुवार      द्वितीया श्राद्ध               अश्विन

5 सितंबर     शनिवार     तृतीया श्राद्ध                 अश्विन

6 सितंबर    रविवार      चतुर्थी श्राद्ध                 अश्विन 

7 सितंबर    सोमवार     महाभरणी/ पंचमी श्राद्ध        अश्विन 

8 सितंबर     मंगलवार      षष्ठी श्राद्ध                    अश्विन

9 सितंबर     बुधवार      सप्तमी श्राद्ध                अश्विन

10 सितंबर    गुरुवार      अष्टमी श्राद्ध                अश्विन 

11 सितंबर    शुक्रवार     नवमी श्राद्ध                 अश्विन 

12 सितंबर    शनिवार     दशमी श्राद्ध                 अश्विन

13 सितंबर    रविवार      एकादशी श्राद्ध              अश्विन

14 सितंबर   सोमवार     द्धादशी श्राद्ध               अश्विन

15 सितंबर    मंगलवार      त्रयोदशी श्राद्ध               अश्विन

16 सितंबर   बुधवार      चतुर्दशी श्राद्ध                अश्विन 

17 सितंबर   गुरुवार      सर्वपितृ अमावस्या           अश्विन

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