ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव न्याय के देवता हैं। वे न्यायधीश या दंडाधिकारी की भूमिका का निर्वहन करते हैं। वह अच्छे का परिणाम अच्छा और बुरे का बुरा फल प्रदान करने वाले हैं। वे सूर्य पुत्र एवं यमराज के भ्राता हैं और अपनी दशा साढ़ेसाती आदि में किए गए कर्म के अनुसार भले या बुरे फल देते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों के कर्मों से शनि देव नाराज हो जाते हैं उनका जीवन कष्टों से भर जाता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं ऐसे 11 सरल उपाय जिनको शनिवार के दिन करने से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त होते हैं और शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है।
शनि देव को प्रसन्न करने के 11 सरल उपाय
- काले घोड़े की नाल अपने घर के दरवाजे के ऊपर स्थापित करें। मुंह ऊपर की ओर खुला रखें। दुकान या फैक्टरी के द्वार पर लगाएं तो खुला मुंह नीचे की ओर रखें। इन उपायों से आप अपने कष्ट दूर कर सकते हैं तथा शनि महाराज की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
- 800 ग्राम तिल तथा 800 ग्राम सरसों का तेल दान करें। काले कपड़े, नीलम का दान करें।
- हनुमान चालीसा पढ़ते हुए प्रत्येक चौपाई पर 1 परिक्रमा करें।
- कांसे के कटोरे को सरसों या तिल के तेल से भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करें।
- काले कुत्ते को तेल लगाकर रोटी खिलाएं।
- काली गाय, जिस पर कोई दूसरा निशान न हो, का पूजन कर 8 बूंदी के लड्डू खिलाकर उसकी परिक्रमा करें तथा उसकी पूंछ से अपने सिर को 8 बार झाड़ दें।
- काला सूरमा सुनसान स्थान में हाथभर गड्ढा खोदकर गाड़ दें। ये भी पढ़ें : श्री शनि चालीसा
- पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें। समय प्रात:काल मीठा दूध वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं तथा तेल का दीपक पश्चिम की ओर बत्ती कर लगाएं तथा ‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र पढ़ते हुए 1-1 दाना मीठी नुक्ती का प्रत्येक परिक्रमा पर 1 मंत्र तथा 1 दाना चढ़ाएं। पश्चात शनि देवता से कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें।
- काले घोड़े की नाल या नाव की कील का छल्ला बीच की अंगुली में धारण करें।
- बिच्छू बूटी या शनि यंत्र धारण करें।
- पानी वाले 11 नारियल, काली-सफेद तिल्ली 400-400 ग्राम, 8 मुट्ठी कोयला, 8 मुट्ठी जौ, 8 मुट्ठी काले चने, 9 कीलें काले नए कपड़े में बांधकर संध्या के पहले शुद्ध जल वाली नदी में अपने पर से 1-1 कर उतारकर शनिदेव की प्रार्थना कर पूर्व की ओर मुंह रखते हुए बहा दें।
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**(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
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